पानी स्पीकर में क्यों फँसा रहता है
स्पीकर ग्रिल के छेद बहुत छोटे होते हैं, अक्सर एक मिलीमीटर से भी छोटे, और उनके पीछे पानी रोकने वाली जाली होती है। सरफ़ेस टेंशन बूँदों को इन छेदों पर टिकाए रखता है, इसलिए सिर्फ़ फ़ोन झटकने से काम नहीं चलता।
धीमी टोन मेम्ब्रेन को एक सेकंड में 200 बार तक आगे-पीछे हिलाती है। जाली से धकेली गई हवा इस टेंशन को तोड़ देती है और बूँदें बाहर आ जाती हैं। अक्सर आप उन्हें ग्रिल पर निकलते हुए देखेंगे।
फ़ोन भीगते ही क्या करें
- अगर पानी कुछ सेकंड से ज़्यादा अंदर गया, तो पहले फ़ोन बंद करें।
- पोर्ट गीला हो तो चार्ज न करें। नमी वाली चेतावनी यूँ ही नहीं आती।
- हेयर ड्रायर न लगाएँ: गर्मी से सील और बैटरी ख़राब होती है।
- चावल में भी न रखें। खुली हवा उतना ही सुखाती है, बिना धूल के।
- पानी वाला मोड 2–3 बार चलाएँ, फिर फ़ोन को एक घंटे सूखी जगह पर रखें।
मानसून, बीच, पूल: डीप क्लीन कब चलाएँ
बारिश का पानी काफ़ी साफ़ होता है, इसलिए पानी वाला मोड काफ़ी है। समुद्र या पूल के बाद नमक और क्लोरीन जाली पर पतली परत बनाकर सूख जाते हैं। डीप क्लीन चलाएँ, फिर सूखे, मुलायम टूथब्रश से ग्रिल साफ़ करें।